저자: VijayKedia · 외국인
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Kedia는 주식투자를 기업 공동소유로 보고, 경영진의 정직성·의욕·역량을 가장 중요하게 본다. 상승 섹터(sunrise)에 머무르고 쇠퇴 섹터(sunset)는 피하라고 강조한다. 매도 사례로 Everest Industries를 들며 석면 원자재 의존과 규제 리스크를 이유로 청산했다고 설명한다. 특정 종목의 단기 가격 전망은 언급하지 않는다.
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मैं क्या सोचता हूँ? भाई, निवेश एक आशीर्वाद वाला व्यवसाय है। मैंने यह कई बार कहा है कि दुनिया में निवेश से बड़ा कोई गुप्त व्यवसाय नहीं है। आप CA नहीं हैं, MBA नहीं हैं, पढ़े-लिखे नहीं हैं, फिर भी आपके पास किसी कंपनी के शेयर हैं। वह शेयर खरीदकर आप उस कंपनी के सह-मालिक बन जाते हैं, आप शेयरहोल्डर बन जाते हैं।
मुकेश भाई अंबानी आपको बताते हैं कि प्रिय शेयरहोल्डर, आपकी अनुमति से मैं अपनी सैलरी बढ़ा रहा हूँ। यह आपके लिए आशीर्वाद है या नहीं? वे सैलरी लें या न लें, आपको डिविडेंड मिलता है। आपकी सैलरी कम हो या ज़्यादा, आपको डिविडेंड मिलता है। आपके पास आशीर्वाद है या नहीं? आप शॉप फ्लोर पर काम नहीं कर रहे हैं। न आपको यूनियन से लड़ना है, न किसी को खुश करना है। आपने एयर-कंडीशन्ड कमरे में बैठकर शेयर लिए और शेयरहोल्डर बन गए। यह बेहतरीन व्यवसाय है, इससे बेहतर कोई व्यवसाय नहीं। लेकिन यह 24 घंटे का व्यवसाय है, 24*7*365 का व्यवसाय है। इसमें आपको पूरी तरह उतरना होगा। यहीं जीना है, यहीं मरना है, और इससे भी आगे जाना है। यही जीवन है।
मेरा मानना है कि जब कोई निवेशक निवेश करता है, तो उसके मन में यह इच्छा ज़रूर होनी चाहिए कि अब वह खुद उद्यमी बने। अब तक वह दूसरों के शेयर लेता था, अब उसे लोगों को अपने शेयर देने चाहिए। यह इच्छा मन में रहनी चाहिए। अब आपने स्टार्टअप निवेश भी शुरू कर दिया है, तो यह यात्रा शुरू हो गई है, क्योंकि स्टार्टअप में निवेश करने पर आप उससे सचमुच जुड़ जाते हैं। उन्हें भी सहारा देना पड़ता है।
चाली मैंगर ने एक बात कही है कि मुझे बताओ मैं कहाँ मरने वाला हूँ, मैं वहाँ नहीं जाऊँगा। अगर कोई कहे कि कोई जगह गलत है, तो वहाँ नहीं जाना चाहिए। आपके अनुभव से क्या लगता है कि नए निवेशकों के लिए कुछ बहिष्कार के मापदंड होने चाहिए, कि वे इस तरह की कंपनियों या सेक्टरों में न जाएँ? सबसे ज़रूरी चीज़ मेरा कोट है। मैंने अपने 30-40 कोटों में यही बातें पिरोई हैं। मेरा एक कोट यह भी है कि अगर मैनेजमेंट खुद अरबपति नहीं बनता, तो आप करोड़पति कैसे बनेंगे? क्योंकि हम उस कंपनी का एक हिस्सा खरीद रहे हैं।
पहले वे 500 करोड़ से 500 करोड़ तक पहुँचेंगे, फिर मैं 5 करोड़ से 50 करोड़ तक पहुँचूँगा। मेरा कोट है कि जब तक मैनेजमेंट में ईमानदार, भूखा और स्मार्ट होने की क्षमता न हो, और वह ईमानदार न हो, तो वह अपने ही लिए पैसा कमाएगा। इसीलिए मैंने कहा कि 6000 कंपनियों में से 5000 स्क्रैप कैप हैं। वे केवल तेज़ी के माहौल में आती हैं और फिर खत्म हो जाती हैं। इसलिए निवेशक को पहले अपना दायरा सीमित करना होगा।
आप बहुत सारी चीज़ें देखते हैं, मैं कोई बेकार खबर नहीं सुनना चाहता। पढ़ाई के लिए मैं उन कंपनियों की हेडलाइन ज़रूर सुनता हूँ जिनमें मेरी रुचि नहीं है। यह मैं समझता हूँ, लेकिन मैं इसमें बहुत ज़्यादा नहीं उलझना चाहता। चार दिन पहले किसी ने एक LED निर्माता कंपनी का प्रस्ताव भेजा और लिखा, सर, मुझे इसमें रुचि है। मैं उसे पढ़ना भी नहीं चाहता। अगर मैं पढ़ रहा हूँ तो अपनी याददाश्त और ध्यान का उपयोग कर रहा हूँ, ऊर्जा खर्च कर रहा हूँ। जिस रास्ते पर नहीं जाना, उसका नाम भी पूछना नहीं चाहता। जितनी कम खबरें पढ़ेंगे, उतना ही आप जो पढ़ रहे हैं उस पर ध्यान दे पाएँगे। इसलिए अपना दायरा घटाना होगा।
जब नए लोग आते हैं तो उनके पास शुरू में उतना ज्ञान नहीं होता। उनके सिर पर हाथ रखने वाला कोई मार्गदर्शक भी नहीं होता, इसलिए वे ऐसे ही काम करते हैं। लेकिन टिकता वही है जो सेफ्टी मार्जिन के साथ टिकता है। खेलते रहना चाहिए। अगर रन न भी बनें, तब भी खाली क्रीज़ पर खड़े रहो। आप सीखते हैं, यह सीखने का खेल है, यहाँ अनुभव का खेल है। अगर पैसा ही आपका एकमात्र कौशल है और आप सोचते हैं कि यहाँ पैसा कमाना है, दिवाली आने वाली है, तो शेयर बाज़ार में आप जल्द ही कंगाल हो जाएँगे। यहाँ केवल अनुभव का खेल है। अनुभव अपने जीत-हार से लो या दूसरों की जीत-हार से लो। दूसरों की गलतियों से सीखोगे तो जल्दी सीखोगे, अपनी गलतियों से सीखोगे तो एक जीवन कम हो जाएगा। वे रन बनाने में पूरी उम्र लग जाएगी, इसलिए दूसरों की गलतियों से जल्दी सीखना बेहतर है।
ऐसा कोई अपवाद सेक्टर या स्टॉक नहीं है जिसे पहले से तय कर दिया गया हो। अगर किसी सेक्टर में नया अवसर आए और मैनेजमेंट भूखा हो, तो उसका मूल्यांकन करना होगा। मेरा कोट है कि सनराइज़ सेक्टर में हर कीमत पर रहो और सनसेट सेक्टर से हर कीमत पर बाहर रहो। मैं हमेशा नए सेक्टरों में सीखने और रहने की कोशिश करता हूँ, पुराने सेक्टर में नहीं जाता। जैसे 1980 में टेक्सटाइल अच्छा चला था, तब उसकी माँग थी, बॉम्बे डाइंग सेंचुरी कभी बहुत चहेता था। उसके बाद 20-30 साल तक वह कुछ नहीं कर पाया। टेक्सटाइल के जो शेयर हमारे पास थे, वे भी ऐसे ही बदलते रहे। सेक्टरों का यह रोटेशन मैं सालाना बदलाव के रूप में नहीं देखता। मैं ट्रेंड के हिसाब से बदलाव देखने की कोशिश करता हूँ, उसमें structural change क्या है, क्या यह सेक्टर 20 साल नहीं बढ़ेगा या 10-20 साल का आंकड़ा नहीं है, पर क्या 10 साल बढ़ेगा या नहीं। अगर उसमें स्पष्टता नहीं है, तो मैं उससे बचता हूँ।
हर व्यक्ति के पास सीमित पैसा होता है। भले ही आपके पास 500 करोड़ हों, फिर भी वे सीमित हैं, क्योंकि आपने उन्हें कहीं न कहीं लगा रखा है। अगर आप कोई नया विचार खोजते हैं, तो आपको कुछ शेयर बेचने होंगे। बैंक में पैसा नहीं रखना चाहिए, अगर बैंक में पैसा रखा है तो आप निवेशक नहीं हैं। अवसर हमेशा कम होते हैं, पैसा बहुत कम होता है, और अच्छे अवसर उनमें भी बहुत कम। इसलिए मैं हमेशा ऐसे उद्योगों में कोशिश करता हूँ जो आगे बढ़ने वाले हैं।
अंतिम सवाल एग्ज़िट स्ट्रेटेजी के बारे में है। आप जो कह रहे हैं, उससे लगता है कि आप सामान्यतः स्टॉक से बाहर नहीं निकलते। लेकिन आप ज़रूर निकले होंगे, तो कोई केस स्टडी बताइए कि आप इस स्टॉक से किस कारण से निकले। मैं कीमत देखकर बाहर नहीं निकलता, भावनाएँ देखकर भी नहीं। अतुल ऑटो में मैंने कीमत देखकर बाहर निकलने का काम किया। एक और उदाहरण मैंने दिया था कि अतुल ऑटो का PE 45 हो गया था जबकि बजाज ऑटो का PE 20-25 था। जब मैंने यह किया, तब हम बजाज ऑटो के आकार के 10% भी नहीं थे। सिद्धांत के अनुसार छोटी कंपनी का PE बड़ी कंपनी से लगातार ऊँचा नहीं रह सकता। जब तक उसमें वृद्धि है, वह टिक सकती है, पर हमेशा नहीं टिकेगी, क्योंकि स्केल की अर्थव्यवस्था होती है, जैसे मैंने अतुल के साथ किया।
एक और उदाहरण के लिए, मैंने एवरेस्ट इंडस्ट्रीज़ लिया। उसके लगभग 6-7% शेयर मेरे पास थे। फिर मैंने उसे छोड़ दिया। उसके तीन डिवीज़न थे। उसमें एस्बेस्टस भी था, PEB था, और बोर्ड व पैनल आदि भी थे। PEB सेक्टर कंपनी पर बोझ था, उसका टर्नओवर भी एक-तिहाई था, प्रॉफिट मार्जिन दो-तीन रुपये था। कभी एस्बेस्टस कमाता, कभी यह कमाता, स्टील की कीमतें बढ़तीं तो वह बढ़ता, गिरतीं तो सीमेंट गिरता। इसमें कुछ नाटक था, तो मुझे समझ आया कि यह थोड़ा खतरनाक फैक्टर है। एस्बेस्टस बनाने वालों का कच्चा माल आयात होता है, भारत में नहीं बनता। मेरी जानकारी के अनुसार इसे केवल दो देश बनाते हैं, यूक्रेन और रूस, और भारत के ये तीन-चार लोग उन पर निर्भर हैं। दो साल पहले किसी देश ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया, और वैसे भी एस्बेस्टस दुनिया भर में प्रतिबंधित है, केवल भारत और चीन में इसका उपयोग होता है। भारत में गाँवों और आवास में इसका बड़ा योगदान है, इसलिए माँग है। जब प्रतिबंध लगा, तो कीमतें बहुत बढ़ीं और कमी हो गई।
उस दिन मैं थोड़ा हिल गया। मुझे लगा कि चूँकि यह इन दो देशों पर निर्भर है, अगर कभी WHO या कोई और एजेंसी ऐसा करती है, तो यह काम खत्म हो जाएगा। यही मिल्किंग काउ की बात है, उसमें एक मार्जिन है। बाकी सब भी ऐसा ही है। तो उस दिन मैं डर गया। मुझे लगा कि जैसे सिगरेट ESG में नहीं है, वैसे ही अगर यह भी ऐसा हो गया तो परेशानी होगी। मैंने बाज़ार के सुधरने का इंतज़ार किया, लेकिन तब तक 2020 में बाज़ार पहले ही डूब चुका था। थोड़ा इंतज़ार किया और फिर रिकवरी शुरू हुई। जब रिकवरी हुई तो मैं उससे बाहर निकल आया। यह सबसे ताज़ा उदाहरण है। समझ रहे हैं?
तो जहाँ थीम की अंतर्निहित संरचना में कोई बदलाव हो, या आपके लिए स्पष्टता न हो, या कहीं सरकारी नियंत्रण हो या कोई विरोध में हो, वहाँ स्पष्टता नहीं है। सीधी बात है कि आपको पता नहीं होता कि संतुष्टि कब मिलेगी। एक ओर उसमें स्टील का बोझ था, उसके कच्चे माल का एक-तिहाई वहीं से आता था, फिर वह हुआ, अब दोनों देशों से शुरू हुआ, पर मैं निकल गया। मुझे ऐसे शेयर के साथ सोना है जिसमें मुझे रात को सोचना न पड़े, मेरा दिमाग पहले न सोचे। जीवन का उद्देश्य खुश रहना है, तो चिंता करके जीवन में क्या करोगे। सही कहा सर।
मन तो नहीं कर रहा कि यह बातचीत बंद करूँ, पर मुझे पता है कि आपका समय मुझे इतना ही मिला है, इसलिए मैं बहुत-बहुत धन्य हूँ।







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