저자: VijayKedia · 외국인
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주식시장에서 돈을 벌려면 최소 4~5년의 학습과 장기 관점이 필요하며, 빠른 수익을 좇는 투기·레버리지(MTF, 신용·카드 대출 투자)는 파멸로 이어진다는 주장. 1년은 짧으므로 최소 4년 이상의 시계로 보라고 강조. 향후 주목 섹터로 관광(항공·호텔·온라인 예약)과 병원(헬스케어)을 꼽았으나 이미 주가가 비싸다고 언급. 본인은 자격이 없어 종목 추천은 하지 않는다고 명시.
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सर, देखिए, अगर आप चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहते हैं तो 5 साल लगते हैं। कई तरह की परीक्षाएँ होती हैं। उसके बाद आर्टिकलशिप करनी पड़ती है, फिर कहीं नौकरी या कोई काम करना पड़ता है, और फिर अपनी प्रैक्टिस शुरू करते हैं। तो यह 5 साल का खेल है।
हाँ, वकील बनना हो या LLB करना हो, तब भी यह चार साल का खेल है। डॉक्टर बनना हो, तब भी चार साल का खेल है। पहले पढ़ाई करके MBBS बनते हैं, फिर किसी के साथ असिस्ट करते हैं, उसके बाद धीरे-धीरे अपनी प्रैक्टिस शुरू करते हैं।
लोगों से पूछिए कि शेयर बाज़ार में आने से पहले आपने क्या पढ़ाई की है? कौन सी आर्टिकलशिप की है? किसके नीचे ज्ञान सीखा है? कितनी किताबें पढ़ी हैं? 100 में से 90 लोग कहेंगे कि उन्होंने कुछ नहीं किया। जी हाँ, कुछ नहीं। यह सब वे क्लासरूम में बैठकर, लाइब्रेरी में बैठकर, या बेडरूम में बैठकर कर रहे होते हैं, या खेल रहे होते हैं, या TikTok देख रहे होते हैं।
तो समझिए कि ऐसे लोग शेयर बाज़ार में कभी सफल नहीं हो सकते। इसमें समय लगेगा। मैंने भी यही शुरू किया था, लेकिन 10 साल तक संघर्ष किया। 10 साल बाद भी मैं ₹10,000 तक नहीं बचा पाया। इसलिए अगर आपके पास इतना समय है, तो बाहर जाकर वापस आना चाहिए या पहले पढ़ाई करनी चाहिए?
पहले कोर्स कीजिए। लोगों को समझिए। लोगों की बातें सुनिए, उनके इंटरव्यू सुनिए, उनका ज्ञान सीखिए। कोई न कोई तरीका तो होना चाहिए। यह कोई आसान खेल नहीं है, सर। ऐसा नहीं है कि कोई भी बिना पढ़ाई या बिना कुछ किए यहाँ आ जाए। इसे जुआ कहते हैं। मैं शेयर बाज़ार की तुलना इसी से करता हूँ। जो लोग बिना किसी तरीके, बिना किसी नीति, और बिना शास्त्रों की समझ के ऐसे आते हैं, वे दरअसल जुआ खेल रहे होते हैं।
अगर आप जुआ खेल रहे हैं, तो नतीजा भी जुए जैसा ही मिलेगा। जुए का नियम है: House Always Wins, यानी घर हमेशा जीतता है। जो जुआ खेल रहा है, वह हमेशा हारेगा। अगर आपका बेड़ा घर की तरफ़ जा रहा है, तो ब्रोकर यहाँ कमाएगा। आप जितने भी ट्रांजैक्शन चार्ज और फीस देते हैं, वह उसकी कमाई है।
जीत में भी वही कमाता है, हार में भी वही कमाता है। आख़िर में आपके हाथ कुछ नहीं आने वाला। तो लोगों को क्या सीखना चाहिए? लोगों को आते ही तुरंत पैसा कमाना है। और सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें तुरंत पैसा कमाना है। शेयर बाज़ार में सबसे बड़ी समस्या यही है कि आपको जल्दी पैसा कमाना है। यही सबसे बड़ी बीमारी है। इन लोगों को वह प्रोटोकॉल या तरीका समझना चाहिए जिसका आप पालन नहीं करते। फिर आप यहाँ पैसा कैसे कमाएँगे? यही लोगों के अंदर की समस्या है।
इससे जुड़ा एक और सवाल है। भारतीय बाज़ार में लीवरेज वाले दांव तेज़ी से बढ़ रहे हैं। ट्रेडर्स का MTF देखिए, और यह दुनिया में और जगह भी हो रहा है। आप जैसे अनुभवी निवेशक कैसे देखते हैं कि कोई व्यक्ति कर्ज़ लेकर शेयर बाज़ार में निवेश करे? लोग पर्सनल लोन ले रहे हैं, क्रेडिट कार्ड से पैसा निकालकर शेयर बाज़ार में लगा रहे हैं। ब्रोकरेज के ज़रिए जो MTF मार्जिन ट्रेडिंग हो रही है, वह तो निश्चित रूप से हो रही है।
आप इसे कैसे देखते हैं?
इसे मैं बर्बादी का संकेत मानता हूँ, और कुछ नहीं। दीवार पर लिखा है [नाक से बोलते हुए] कि जो लोग यह काम कर रहे हैं, वे डूबने वाले हैं। वे शायद मर चुके होंगे, अभी तक ज़िंदा नहीं होंगे। साल 2000 जो बीत गया और यहाँ जो गड़बड़ी हुई, उसमें वे बेचारे लोग मर गए होंगे। इसमें CB का भी डेटा है। दस में से नौ लोग घाटे में हैं। SEBI ने जो बताया कि लोगों को 76,000 करोड़ या 1 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है, या एक साल में जो भी डेटा आया, वह मुझे ठीक से याद नहीं। यह इन्हीं लोगों का है। EMI पर, यानी क्रेडिट कार्ड से पैसा लेकर, आप शेयरों में सट्टा लगा रहे हैं, तो वह जहाज़ डूबने वाला है।
इससे आप बच नहीं सकते। समझिए कि यह सिद्धांत भी एक तरीका है। लेकिन सर, मौत के बिना स्वर्ग नहीं मिलता। हाँ, आप उन्हें कितना भी सिखाइए, वे सीखने वाले नहीं हैं। अगर वे इन चीज़ों से सीखेंगे, तो एक बार, दो बार करेंगे, गिरेंगे, थोड़ा पढ़ेंगे, और फिर उसके बाद ज्ञान हासिल करेंगे। फिर वे सही रास्ते पर आएँगे। बाज़ार तो हवा में लड़खड़ाता और झूलता रहेगा।
आपको लगता है कि निवेशकों को अगली दिवाली तक किन तीन सेक्टरों पर ध्यान देना चाहिए? तो मेरा सोचना यह है कि अगली दिवाली के लिए यह छोटा सा बदलाव ही दिमाग में नहीं रखना चाहिए। हाँ [गला साफ़ करने की आवाज़] पाँच साल का नज़रिया रखना चाहिए। ठीक है? अगर आप कभी शेयर बाज़ार में निवेश करना चाहते हैं, तो चार साल से कम का समय मन में नहीं रखना चाहिए। कभी-कभी पूरे साल बाज़ार बिल्कुल अच्छा प्रदर्शन नहीं करता। [नाक से बोलते हुए] उस कंपनी में दम है, उस सेक्टर में दम है, अर्थव्यवस्था में दम है, लेकिन प्रदर्शन नहीं होता। तो ऐसा कहने से एक साल बहुत छोटा हो जाता है, इसलिए थोड़ा लंबा नज़रिया रखना चाहिए। और यह भी सच है कि इस बाज़ार में, जैसा मैंने कहा, एक साल तक बाज़ार में ज़्यादा बदलाव न दिखे, यह संभव है। लेकिन फिर भी, जैसा मैंने बताया, आपको ऐसे सैकड़ों शेयर मिलेंगे जो ऑल टाइम हाई के बाद भी ऑल टाइम हाई पर पहुँचे।
बाज़ार में आपको ऐसे कई मौके मिलेंगे। तो मुझे दो-तीन सेक्टर पसंद हैं। पहला, मुझे टूरिज़्म सेक्टर पसंद है। मैं हमेशा कहता हूँ कि भारत ऐसा देश है जहाँ विदेश में दिखने वाले सारे टूरिज़्म के नज़ारे मिल जाते हैं। बीच हों या रेगिस्तान, हरियाली हो या मंदिर, वास्तुकला हो या सफारी, या धार्मिक पर्यटन, कुछ भी हो। भारत भर की हर चीज़ यहीं है। हमें भारत से बाहर जाने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन समस्या है। यहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। अच्छे होटल नहीं हैं। कनेक्टिविटी नहीं है। स्टेशन अच्छे नहीं हैं, प्लेन के लिए एयरपोर्ट की सुविधाएँ नहीं हैं, साफ़-सफ़ाई नहीं है, और मार्केटिंग भी नहीं है। लोग बड़ी बात नहीं बनाते कि देखिए, हमारे पास यह है। वरना ऐसा मंदिर है, उसकी ऐसी वास्तुकला है। आप उन्हें देखिए, कोणार्क मंदिर देखिए। जब सूरज की रोशनी पड़ती है, तो वह वहाँ पहुँचकर भगवान की मूर्ति पर गिरती है। उस समय इतनी तकनीक नहीं थी, फिर भी किसने क्या बनाया? यहाँ ऐसी सैकड़ों चीज़ें हो सकती हैं, सर, लेकिन उन्हें हमारे सामने मार्केट नहीं किया जाता। लोगों में जागरूकता नहीं है। अभी लगता है कि सरकार सोच रही है कि इसे बढ़ावा देना चाहिए। इसलिए मुझे टूरिज़्म से जुड़े शेयर पसंद हैं। एयरलाइंस के शेयर भी इसमें शामिल हैं। होटल भी आते हैं। ऑनलाइन होने वाली टिकट बुकिंग आदि के शेयर भी मिलते हैं। लेकिन ये सारे शेयर महंगे हैं। ये सस्ते नहीं हैं। इसलिए इसे ध्यान में रखना चाहिए। कभी-कभी ये गिर भी सकते हैं। कभी मैं आपकी बात भी मानूँगा। कोई टूरिज़्म पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।
दूसरा, मुझे हॉस्पिटल इंडस्ट्री पसंद है। कोविड के बाद लोगों में जागरूकता आई है कि हाँ भाई, पहला सुख है स्वस्थ रहना और दूसरा सुख है घर में प्यार। अब लोगों ने यह समझ लिया है। तो अब हर कोई सेहत पर ध्यान देता है। और जब कंपनी या देश हेल्थ केयर में कोई प्रगति करता है, तो और ज़्यादा लोग ध्यान देते हैं कि हाँ भाई, ठीक है, फिर भी जीवन जीना है, आराम से जीना है। कोविड ने सबको सिखाया है कि हाँ भाई, कितने दिन जीना है, आराम से जियो। बिस्तर पर लेटे-लेटे जीतने का क्या फ़ायदा है? मरना है तो सक्रिय होकर मरो, वही सबसे अच्छी मौत है। लोगों में यह भावना है, जैसा कि वे मुझे बता रहे हैं। और भारत में जिस तरह से हालात हो रहे हैं, भविष्य में भी बिस्तरों की कमी होने वाली है। डॉक्टरों की कमी होने वाली है। नर्सों की कमी होने वाली है। तो यह सेक्टर मेरे लिए नहीं है [नाक से आवाज़] 10-15 साल के लिए। क्या आप नहीं बता सकते? हाँ, मैं नहीं बता सकता, क्योंकि मैं न ब्रोकर हूँ, न एडवाइज़र, न कंसल्टेंट, न पोर्टफोलियो मैनेजर। मैं न कोई पॉडकास्ट करता हूँ, न कोई टिप देता हूँ। और मुझे इसकी इजाज़त भी नहीं है। मेरे पास लाइसेंस भी नहीं है। उस एप्पल सेट में भी मैं योग्य नहीं हूँ। तो उसे बताने से गड़बड़ हो जाएगी। वरना मैं देखूँगा, सर, समुद्र है। अगर मैं इसे अपने हाथों में ले आया हूँ, तो आप भी अपना शेयर ला सकते हैं। सब आदमी पानी ला सकते हैं। बराबर है। लेकिन अब मैं बोल रहा हूँ और मेरे शेयर भी ग़लत हैं। जैसा मैंने बताया, मेरे दो-तीन शेयर पिछले पाँच से सात सालों में प्रदर्शन नहीं कर पाए। अगर आप वह लेंगे, तो आपको अवसर की लागत (opportunity cost) उठानी पड़ेगी। मैं बस वहाँ बैठ जाऊँगा। बाद में, जब मेरी आय बढ़ेगी, तब मैं कमाऊँगा। [नाक से आवाज़]







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