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Blue Chip Wealth Creation Strategy | क्या होता है Blue Chip ? विस्तार से जानें Raamdeo Agrawal से

CNBC Awaaz. · 2024-12-10 · 유튜브 시청 13,427 · Board Views 8 · International

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저자: RaamdeoAgrawal미상소속추정 · 외국인

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블루칩 중 최고점 대비 50% 이상 하락한 '멍든 블루칩(bruised blue chip)'을 찾는 투자 프레임워크를 소개. 기준은 최근 5년 고점 대비 50% 이상 하락 + 10년 연평균 수익률 20% 이상 + 시총 상위 250위권. 하락 원인을 내부/외부/시장 요인으로 분석하고 회복 가능성을 판단하는 방법을 설명. 특정 종목 추천이 아닌 예시와 프레임워크 중심.

다듬은 글

※ AI가 다듬은 글(오탈자·군말 정리)

01. Anuj, यह अध्ययन ऐसे शुरू हुआ कि हम तीन लोग — मैं अपने ऑफिस में बैठकर, Dhruv Mehta और मेरे एजेंट असिस्टेंट Shrinath — तय कर रहे थे कि इस बार किस विषय पर पढ़ाई करें। दो-तीन विकल्प थे: एक, बाज़ार के नए हाई पर बिकवाली, और दूसरा, turnaround। Turnaround पर हमने पहले कभी काम नहीं किया था, तो तय हुआ कि इसे शुरू करते हैं। पहली बार में यह बहुत कठिन विषय लगा, फिर हमें एक किताब मिली जिसमें अमेरिका के turnaround stocks से पैसा बनाने की बुनियादी बातें 30 पेज में लिखी थीं। मैंने कहा, हमें एक framework मिल गया है, अब इस पर काम करते हैं।

02. उस किताब में बताया गया है कि जब कोई शेयर अपने हाल के हाई या all-time high (भारत में आम तौर पर पाँच साल का हाई) से 50 प्रतिशत से ज़्यादा गिर जाए, तो उसे देखना चाहिए। ऐसे सैकड़ों शेयर हो सकते हैं, लेकिन उनमें से हमें दो तरह के शेयर खोजने हैं: bruise blue chips और busted growth stocks। इस बार हमने केवल bruise blue chip वाला हिस्सा लिया, busted growth stocks को अगली बार के लिए रखा।

03. पहली दिक्कत यही थी कि blue chip है क्या? सिर्फ market cap से तय होता है या कुछ और भी? हर कोई अलग परिभाषा दे सकता है, लेकिन अध्ययन के लिए मैंने अपने अनुभव से एक परिभाषा रखी: - कंपनी ने पिछले 10 साल में 20 प्रतिशत से ज़्यादा का रिटर्न दिया हो, और - आकार (size) भी बड़ा हो।

04. आकार के लिए हमने top 250 कंपनियाँ लीं। इससे लगभग 80-90 कंपनियाँ बचीं। फिर कहा गया कि कई बड़ी कंपनियाँ इससे बाहर रह जाएँगी, तो हमने थोड़ा ढीला करके पूरे दायरे में देखा और लगभग 100 कंपनियों तक पहुँचे।

05. पिछले पाँच साल का जो भी उच्चतम स्तर है, उससे अगर शेयर 50 प्रतिशत से नीचे चला जाए, तो 50 तक गिरावट को केवल correction मानें। लेकिन 50 से नीचे गिरना गंभीर है। मान लीजिए किसी समय शेयर 1000 रुपये पर था और कंपनी की वैल्यू बहुत बड़ी थी, अब वह 500 या उससे नीचे आ गया। इसका मतलब है कि कंपनी में कहीं न कहीं गहरी समस्या है: कमाई का गलत आवंटन (misallocation), प्रतिस्पर्धा का दबाव, या कुछ और। तो अगला सवाल यह होता है कि परेशानी के स्रोत को कैसे पहचानें और उसका इलाज क्या हो सकता है।

06. इस रिपोर्ट में कई शेयरों के नाम आएँगे, वे केवल उदाहरण के लिए हैं, उन्हें किसी भी तरह की सिफ़ारिश न समझें।

07. अब कुछ उदाहरण: S Bank, IndiaBulls Housing, Jet Airways, Suzlon। इनमें से कुछ ने वापसी भी की, लेकिन ये सब किसी समय blue chip नहीं थे। असली blue chip वे थे जो Nifty में थे। अगर कोई Nifty का शेयर उस स्तर से गिरा, तो उसे bruise blue chip माना जा सकता है। हर मामले में वापसी की गारंटी नहीं होती, लेकिन सवाल यही है कि कब हम कहें कि यह bruise है और कब नहीं, वरना बात वहीं खत्म हो जाती है।

08. निवेश केवल एक स्थिति (situation) पर फैसला नहीं है। अगर कोई चीज़ 50-60 प्रतिशत गिर गई है, तो देखना होगा कि क्या वह blue chip है। मैं 20 प्रतिशत वाले मानक से सहज हूँ, क्योंकि जिसने पिछले 10 साल में 20 प्रतिशत कमाया है, वह किसी न किसी रूप में Nifty का हिस्सा हो सकता है। एक framework होना ज़रूरी है।

09. फिर यह देखना होता है कि गिरावट क्यों आई: क्या समस्या कंपनी के अंदर की है या बाहर की? उसके बाद तय करना होता है कि कंपनी इस हालात से बच पाएगी या नहीं, और उससे भी ज़रूरी, क्या वह फिर से फले-फूलेगी?

10. आम तौर पर blue chip कंपनियों में वापसी की प्रवृत्ति मज़बूत होती है। जैसे ऋषभ पंत चोटिल हुए, दो-तीन साल बाहर रहे, फिर लौटे और कप्तान बने। या जैसे विराट कोहली या सचिन दो-चार पारियों में शून्य पर आउट हो जाएँ, तो भी वे बेकार नहीं हो जाते; वे खेल जानते हैं, मुश्किल स्थिति में भी बल्लेबाज़ी कर सकते हैं। इसी तरह blue chip कंपनियों में वह core capability होती है। लौटने पर वे अपनी पुरानी जगह वापस पाती हैं और फिर आगे बढ़ती हैं।

11. इसलिए सबसे ज़रूरी अंतर यह समझना है: bruise (चोट) और broken (टूटा हुआ) में फर्क है। Bruised कंपनी का आधार बचा है, उसे ठीक किया जा सकता है। Broken कंपनी का मूल ढाँचा ही खत्म हो गया है।

12. उदाहरण के लिए, किसी कंपनी में प्रबंधन बदला, नई रणनीति आई, और उसके बाद शेयर कई गुना बढ़ गया। ऐसी कंपनियों में अक्सर पहले अच्छा लाभांश (dividend), मज़बूत वेल्थ-क्रिएशन और कुल मिलाकर सुदृढ़ इतिहास होता है। सवाल यह है कि कब आपको भरोसा हो कि यह केवल चोट है और लौटेगी।

13. मेरे अपने अनुभव में, Indian Hotels जब 70 रुपये पर था, तब मुझे भरोसा था। लेकिन उस समय मेरे पास कोई framework नहीं था। मैंने दिल्ली में एक भाषण में कहा था कि अपना real estate portfolio बेचो, पर वह बस एक बातचीत थी। अब हमारे पास framework है।

14. इस अध्ययन में मोटे तौर पर तीन तरह की समस्याएँ देखी गईं:

15. 1. **बाज़ार से जुड़ी गिरावट:** जैसे Covid के समय, जब पूरा बाज़ार 50 प्रतिशत गिर गया। तब अच्छी कंपनियाँ भी गिरती हैं। इसका इलाज है बाज़ार का वापस आना। Global Financial Crisis में भी बैंकों के शेयर book value से नीचे चले गए थे, फिर बाज़ार लौटा। Covid में फरवरी में all-time high, मार्च में all-time low, और जून-जुलाई तक वापसी हुई। इस दौरान Lako, Indian Hotels और Mahindra जैसे शेयर सस्ते में मिले।

16. 2. **कंपनी के बाहर की समस्या (external):** प्रतिस्पर्धा। कोई नया खिलाड़ी आता है और सबसे ज़्यादा बाज़ार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए कीमतें बहुत नीचे ले आता है। इससे पूरे उद्योग का मुनाफ़ा खत्म हो जाता है। जैसे दूरसंचार में 12 खिलाड़ी घटकर तीन रह गए। जिस कंपनी ने यह लड़ाई जीती, उसका शेयर भी बाद में बहुत बढ़ा, पर पूरे उद्योग की कमाई पर असर पड़ा। Bharti की कहानी में 2003 में IPO से नीचे का भाव एक अवसर था।

17. 3. **कंपनी के अंदर की समस्या (internal):** कंपनियाँ भी गलतियाँ करती हैं। सबसे बड़ी समस्या है पूँजी का गलत आवंटन (misallocation)। जैसे CG Power में प्रबंधन की समस्या रही। Mahindra ने SsangYong खरीदा, Tata Steel ने Corus खरीदा। ये महत्वाकांक्षी फैसले थे, जो बैंकर्स के समझाने पर किए गए, पर कई लोग बाद में पीछे हटे और कंपनी की ऊर्जा और ध्यान बिखरे। फिर भी Mahindra tractors में नंबर एक बना रहा। बाद में Sangam बेचने जैसे कदमों से ध्यान फिर केंद्रित हुआ।

18. कभी-कभी एक ही कंपनी में तीनों तरह की समस्याएँ एक साथ आ सकती हैं: अंदर की, बाहर की, और बाज़ार की। जब ये मिल जाती हैं, तो शेयर बहुत नीचे आ जाता है, और तब ही शायद आपको बहुत सस्ते भाव पर शेयर मिलने का मौका मिलता है। सवाल यह है कि वह मौका कब आएगा और कैसे खेला जाएगा, इसका जवाब framework में है: कंपनी के शेयर किन रास्तों से गिरते हैं, यह समझना।

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