저자: VijayKedia · 외국인
요약 보기
Vijay Kedia는 인도 Nifty 지수가 장기적으로 크게 성장할 것이라고 보며, 50,000 도달 시점을 2050년 무렵으로 제시한다. 과거 데이터를 근거로 Nifty 50,000은 2033년 무렵 도달 가능성을 언급했고, 인도 주식시장이 10년 내 약 2.5배, 6~7년 내 2배 성장할 수 있다고 봤다. 이 과정에서 특정 섹터가 아니라 모든 섹터가 참여하는 전면적 성장이어야 진정한 발전이라고 주장했다. 섹터별로는 2년 주기로 주도 업종이 순환(로테이션)할 것이라고 설명했으나, 구체적 유망 종목은 언급하지 않았다. 인도 시장이 비싸다는 지적에 대해서는 우량 기업은 프리미엄을 지불해야 하며, 인도가 '트렌드'가 되면서 가격이 높게 형성된다고 답했다. 싸지기를 기다리는 관망자들은 결국 진입하지 못하는 경우가 많다고 지적했다. 개인투자자에게는 주식을 게임이 아닌 사업으로 대하라고 조언했다. 리서치와 원칙 없이 사고파는 것은 도박이며, 인도 SEBI 자료를 인용해 대부분이 손실을 본다고 언급했다. 마지막으로 지식과 인내의 사업이며 소문이나 팁에 시간을 낭비하지 말라는 메시지를 노래 가사 형식으로 전달했다. 영상은 2023년 12월 22일 방송으로, 대상 자산(삼성전자 등 국내 종목, 미국 지수 등)에 대한 단기 방향 예측은 없다.
다듬은 글
NDTV Profit पर हमारे पास एक बहुत खास मेहमान हैं। ये जब भी बोलते हैं, दिल से बोलते हैं। चार्ट और तमाम आंकड़ों से परे, जो भी कहते हैं वह अपने अनुभव पर आधारित होता है। हमारे साथ बाज़ार के दिग्गज निवेशक विजय केडिया सर हैं। आपका स्वागत है, और इस खास दिन हमें समय देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
सर, सबसे पहले मैं आपसे यह समझना चाहता हूं कि Nifty का स्तर 50,000 तक कब पहुंचेगा, क्योंकि आप लंबी अवधि का अनुमान भी लगा सकते हैं और आप जानते हैं कि एक निश्चित समय में बाज़ार कितनी दूर तक जा सकता है। तो सबसे पहले, मुझे यहां बुलाने के लिए धन्यवाद। मैं NDTV Profit का आभारी हूं। और जहां तक सवाल की बात है, हर चीज़ का जवाब आपको इतिहास से मिलता है।
पहले क्या हुआ था? अगर हम पिछले आंकड़ों को देखें, तो लगता है कि शायद 10 साल के भीतर, जो आप कह रहे हैं कि Nifty इंडेक्स 500 तक कब पहुंचना चाहिए, उसके हिसाब से लगता है कि अगले 10 सालों में हम वहां पहुंच सकते हैं। पुराने आंकड़ों के हिसाब से लगता है कि हम 2033 तक वहां पहुंच सकते हैं, सर। अगर हम 2050 तक 50,000 के स्तर की बात करें, तो मैं चाहूंगा कि आप उस सेक्टर को समझें, क्योंकि आप ग्रोथ को पहचानते हैं, आप उन चीज़ों को पहचानते हैं जहां अगली तेज़ी आने वाली है। तो वे कौन से क्षेत्र होंगे, भले ही आप सेक्टर का नाम न बताना चाहें, आप इन क्षेत्रों के बारे में बता सकते हैं, कि किन क्षेत्रों में अगली ग्रोथ आएगी और वे Nifty को 50,000 तक ले जाएंगे।
देखिए, जब हम 50,000 के इंडेक्स की बात करते हैं और यह समझते हैं कि हम सोच रहे हैं कि हां, इंडेक्स 10 साल में ढाई गुना हो जाएगा, या छह-सात साल में दोगुना, अगर हम ऐसी संभावना को लेते हैं, तो मोटे तौर पर यह समझना चाहिए कि इसमें हर सेक्टर को हिस्सा लेना होगा, नहीं तो जो ग्रोथ आएगी, उसे हम लंगड़ी ग्रोथ कहेंगे, वह स्थिर ग्रोथ नहीं होगी। क्योंकि अगर विकास होता है तो वह सर्वांगीण विकास होना चाहिए, तभी उसे असली विकास माना जाता है। तो मुझे लगता है कि इसमें सभी सेक्टर हिस्सा लेंगे।
हो सकता है कोई 4000 मीटर दौड़ा हो और कोई 1000 मीटर। कुछ ने किसी में ज़्यादा प्रगति की और कुछ ने कम। पर यह घूमता रहेगा, और इस रोटेशन के भीतर आपको समझना होगा कि अगर एक सेक्टर दो साल चलता है, तो फिर दो साल के लिए दूसरा सेक्टर आएगा। क्योंकि 500 इंडेक्स वाला यह पूरा खेल, जिसकी हम बात कर रहे हैं, तभी होगा जब आबादी बढ़ेगी और उत्पादकता बढ़ेगी। यह सब सभी सेक्टर में कमोबेश हिस्सा लेंगे, सर।
हां, मैं एक ऐसा सवाल पूछना चाहता हूं जिसका सबसे अच्छा जवाब मुझे पता है आपसे मिलेगा। लोग कहते हैं कि भारतीय बाज़ार में कीमतें महंगी हैं, और मुझे लगता है आप इस सवाल का बहुत अच्छा जवाब देना चाहेंगे। इसलिए मैंने यह सवाल आपके लिए रखा है, क्या आप ऐसा बिल्कुल सोचते हैं, और इस समय, बाज़ार के इस स्तर पर, 21,000 के इस स्तर पर, आप क्या सोच रहे हैं।
देखिए, प्रीमियम क्वालिटी की चीज़ के लिए आपको प्रीमियम देना पड़ता है। इसे समझिए, जब आप कोई बैग खरीदने जाते हैं। हां, समझिए कि लाई पत्तों का एक बैग है, वह बैग 1.5 लाख, 2 लाख, 2.5 लाख में मिलता है, आपका वैसा ही दिखने वाला बैग ग्रे मार्केट में 000 में मिल सकता है, लेकिन बिलियन डॉलर वाली कंपनियां दा मिलान या किसी और छोटी कंपनियों जैसी नहीं हैं, वे बिलियन डॉलर कंपनियां नहीं हैं, वे बड़ी कंपनियां बिलियन डॉलर कंपनियां बनती हैं। यानी उस चीज़ के लिए आपको प्रीमियम देना होगा। मुझे लगता है कि यह भारत एक कल्ट बन रहा है, यह फैशन बन रहा है, यह ट्रेंड बन रहा है, तो इसकी कीमत तो चुकानी होगी। टाइटन की कीमत अलग है, रोलेक्स की कीमत अलग है, तो वह प्रीमियम तो देना पड़ेगा। और जो लोग किनारे बैठे रहते हैं, जो फैन सीटर हैं या जो चूक जाते हैं, वे सोचते हैं कि भारत महंगा हो गया, यह हो गया, वह हो गया। जो लोग महंगा कहते हैं, वे भी इंतज़ार करते हैं कि यह 10 तक गिरे, कि अगर 10 तक गिरा तो मैं इसमें घुसूंगा, और अगर 10 तक नहीं गिरा तो पहले 20 तक बढ़ा और फिर 10 तक गिरा, तब वे इसमें घुसेंगे और सोचने लगेंगे कि यह सस्ता होने वाला है। तो यह सस्ते और महंगे का एक माइंड गेम है।
अच्छी चीज़ के लिए आपको प्रीमियम देना होगा, क्वालिटी वाली चीज़ के लिए आपको प्रीमियम देना होगा। रिटेल निवेशक के लिए मैं आपसे एक सलाह जानना चाहूंगा। हमारी टैगलाइन है कि हम सभी पैसे से प्यार करते हैं। तो क्या आप रिटेल निवेशक को पैसा कमाने का कोई गुरु मंत्र देना चाहेंगे, कि वह बाज़ार और अपने फंड्स से लंबी अवधि में कैसे संपर्क करे ताकि पैसा कमाए?
देखिए आप जो कह रहे हैं, हम पैसे से प्यार करते हैं, बेशक हम पैसे से प्यार करते हैं, लेकिन पैसे को भी हमसे प्यार करना चाहिए, यह दोनों तरफ़ से होना चाहिए, यह सिर्फ़ एकतरफ़ा नहीं होगा। रिटेल निवेशक को मेरी सलाह यह है: पैसा कमाने की जल्दी मत कीजिए, इसे बिज़नेस समझिए, गेम मत समझिए। मेरा कथन है कि अगर आप बाज़ार को गेम मानेंगे, तो वह आपको आपकी अपनी धारणा के हिसाब से इनाम देगा। अगर आप बाज़ार को गेम मानेंगे, तो वह आपके लिए गेम ही साबित होगा। आम तौर पर जब लोग आते हैं, तो वे कोई रिसर्च नहीं करते, कोई होमवर्क नहीं करते। वे बिना किसी ज्ञान, बिना किसी अनुभव, बिना किसी फ़ॉर्मूला या मैट्रिक्स का इस्तेमाल किए, जुआ खेलने, गेम खेलने आते हैं, और बस यह खरीद लेते हैं और वह बेच देते हैं, आज खरीदा और कल बेच दिया। तो वे तरीके से नहीं, वायर्ड तरीके से काम करते हैं। वे व्यवस्थित और अनुशासित तरीके से काम नहीं करते। सेबी भी यही कहता है: 10 में से 10 लोग पैसा गंवाते हैं। तो रिटेल निवेशकों के लिए सलाह है कि इसे बिज़नेस की तरह लीजिए। अगर आप कोई बिज़नेस शुरू करते हैं, तो क्या आप होमवर्क करते हैं? कौन सा अनुशासन लगाते हैं? क्या आप व्यवस्थित तरीके से काम करते हैं? आपको उसी तरह बिज़नेस की समझ के साथ इसके पास जाना चाहिए।
बेशक, जो दर्शक आपको बहुत पसंद करते हैं, उन्हें इंटरव्यू में आखिरी चीज़ जो सुननी होगी वह यह है कि आप बहुत सारी क्रिएटिव लाइनें लिखते हैं, गाने लिखते हैं, कविताएं लिखते हैं। तो आज NDTV Profit Lunch के मौके पर, अगर आप दर्शकों के साथ कुछ साझा करना चाहते हैं, कोई नई चीज़ जो आपने लिखी है, जिसमें कोई संदेश भी हो, और थोड़ा मनोरंजन भी हो, और उसमें एक बहुत गंभीर बात भी छिपी हो जो हल्के अंदाज़ में उन तक पहुंचे।
अगर आप अपनी तरफ़ से कुछ कहना चाहते हैं, तो मैंने एक गीत लिखा था, वह गीत मैंने कुछ दिन पहले रिलीज़ किया है, उसकी कुछ पंक्तियां मैं आपके लिए पढ़ता हूं: सोच-समझकर निवेश करो, अफ़वाहों में वक्त मत गंवाओ, टिप्स के पीछे मत भागो, यह ज्ञान और धैर्य का धंधा है, अनुभव से सीखो और अपना सर्वश्रेष्ठ दो। तो अनुभव से सीखो और अपना सर्वश्रेष्ठ दो। बिल्कुल सही, सर, आज आपने अपना समय दिया और NDTV Profit से बातचीत की, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद सर, धन्यवाद, धन्यवाद।





Comments 0