저자: VijayKedia · 외국인
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Vijay Kedia의 종목 선정 방법 소개. R·I·S·E 프레임워크(재생에너지, 인프라, 보안·방산, 신기술) 중심, 3PL 신테마 언급. 'out of form' 기업(일시적 문제로 주가 부진) 발굴 전략 강조. 대표 사례 Neuland Laboratories는 2020년 3월 약 ₹250에서 2026년 8월 52주 고점 ₹23,881로 약 95~100배, 현재 포트폴리오 약 1%(약 ₹295 크로어). 가격목표보다 스토리 중시, 포트폴리오 25~30개 상장주와 약 25개 스타트업. 시멘트·철강은 8~10년간 미투자. 방송은 정보 제공 목적 및 전문가 상담 권고.
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हर निवेशक शेयर बाजार में मल्टीबैगर की तलाश में रहता है। लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसा शेयर कैसे पहचाना जाए जो भविष्य में बड़ा रिटर्न दे सके। इसलिए निवेशक विजय केडिया ने अपने स्टॉक चुनने का तरीका साझा किया है। केडिया के पास लगभग ₹1,400 करोड़ का लिस्टेड इक्विटी पोर्टफोलियो है, और उनका ध्यान बड़ी इंडेक्स कंपनियों के बजाय मिड-कैप कंपनियों पर ज्यादा रहा है।
आप सब जानते हैं कि विजय केडिया स्मॉल कैप और मिड कैप कंपनियों पर ज्यादा दांव लगाते हैं। उनका मानना है कि अगला बड़ा मल्टीबैगर अक्सर वहीं मिलता है जहां बाजार का ध्यान अभी पूरी तरह नहीं गया है। इस वीडियो में हम बताएंगे कि केडिया ने वह तरीका साझा किया है जिससे वे ऐसे शेयर चुनते हैं जो भविष्य में मल्टीबैगर बन सकते हैं।
लेकिन एक बात साफ कर दें। मनी नाइन का मकसद सिर्फ आपको जानकारी देना है। किसी भी शेयर में पैसा लगाना है या नहीं, यह आपको अपनी रिसर्च के बाद समझदारी से तय करना चाहिए। इसके लिए आप किसी एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकते हैं। तो चलिए, कहानी आगे बढ़ाते हैं।
ET के मुताबिक, केडिया की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा RISE फ्रेमवर्क है। इसमें R का मतलब है रिन्यूएबल्स और एनर्जी ट्रांजिशन। I का मतलब है इन्फ्रास्ट्रक्चर। S का मतलब है सिक्योरिटी, जिसमें डिफेंस और साइबर सिक्योरिटी शामिल हैं। और E का मतलब है इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन और डेटा सेंटर।
उनका ध्यान ऐसे क्षेत्रों पर है जो अपने शुरुआती या उभरते चरण में हैं और जिनमें आने वाले सालों में बड़े अवसर दिखते हैं। केडिया का एक और अहम नियम है कि उभरते थीम्स को पहचानो, लेकिन जैसे ही वे पुराने हो जाएं, उनसे बाहर निकल जाओ। उन्होंने कहा कि पिछले 8 से 10 साल में उन्होंने सीमेंट और स्टील के शेयरों में निवेश नहीं किया है।
पुराने निवेश को छोड़ दें तो कोविड के बाद उनका ध्यान इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेलीकॉम पर गया। लेकिन बाद में उन्होंने इनमें से ज्यादातर पोजीशन से बाहर निकलना शुरू कर दिया। अब रिन्यूएबल्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर, सिक्योरिटी और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज के साथ थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स यानी 3PL भी उनके लिए नया थीम बन गया है। उनका कहना है कि इस बिजनेस में अपेक्षाकृत कम पूंजी लगती है और इसमें मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी और एक्जीक्यूशन की भूमिका ज्यादा होती है। इसी सेगमेंट में उन्होंने SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड एक लॉजिस्टिक्स कंपनी में भी निवेश किया है।
लेकिन किसी थीम की पहचान करना काफी नहीं है। अब हम आपको बताते हैं कि विजय केडिया ने 6 साल पहले ₹250 की कीमत पर एक शेयर खरीदा था, जो अब लगभग ₹23,000 हो गया है। यानी उनका पैसा 95 से 100 गुना बढ़ गया है।
केडिया का अगला तरीका है आउट ऑफ फॉर्म कंपनी को देखना। यानी ऐसी कंपनी जो पहले अच्छा प्रदर्शन कर चुकी है, लेकिन किसी अस्थायी समस्या जैसे खराब तिमाही या एक्जीक्यूशन में देरी की वजह से बाजार का ध्यान खो चुकी है। इस रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण न्यूलैंड लैब्स है।
केडिया ने सितंबर 2019 के आसपास इसमें निवेश शुरू किया और मार्च 2020 के कोविड डर के दौरान लगभग ₹250 प्रति शेयर पर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। न्यूलैंड का पेप्टाइड बिजनेस देरी का शिकार हुआ और शेयर दबाव में आया। लेकिन केडिया कंपनी की मूल कहानी के प्रति भरोसे पर कायम रहे। बाद में यह शेयर 18 अगस्त 2026, यानी पिछले महीने ही, ₹23,881 के 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। मार्च 2020 के ₹250 के मुकाबले यह लगभग 95 से 100 गुना दिखता है।
केडिया ने शुरू में न्यूलैंड में लगभग 1.5% से 1.7% हिस्सेदारी बनाई थी। बाद में लगभग 5% से 6% हिस्सेदारी अलग-अलग कीमतों पर बेची, लगभग ₹7500 के आसपास। बाकी हिस्सेदारी रखकर उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से अब उसकी औसत लागत शून्य है। जून तिमाही के अंत में उनके पास न्यूलैंड में लगभग 1% हिस्सेदारी थी, जिसकी वर्तमान कीमत लगभग ₹295 करोड़ है।
उनका तरीका सिर्फ मैनेजमेंट की बात सुनने तक सीमित नहीं है। अगर वे किसी फार्मा कंपनी को देखते हैं, तो सिर्फ उसके मैनेजमेंट की बात नहीं सुनते, बल्कि पूरे फार्मा सेक्टर की कंपनियों की टिप्पणियों पर भी नजर रखते हैं। न्यूलैंड के मामले में कई CDMO कंपनियां इसी तरह के ग्रोथ अवसरों की बात कर रही थीं। केडिया के मुताबिक यह संकेत उनके लिए अहम था।
साथ ही, उनका कहना है कि हर इंडस्ट्री का टेक्निकल एक्सपर्ट बनना जरूरी नहीं है। जरूरत से ज्यादा विश्लेषण अक्सर लकवे (पैरालिसिस) की तरह होता है, यानी ज्यादा विश्लेषण फैसला लेने में रुकावट बन जाता है।
केडिया का एक और बड़ा मंत्र है फिक्स्ड प्राइस टारगेट के बजाय कहानी पर फोकस करना। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने न्यूलैंड के लिए प्राइस टारगेट तय किया होता, तो शायद वे बहुत पहले बेच चुके होते। उनका मानना है कि शेयर के पीछे की कहानी मायने रखती है, टेबल पर रखा पैसा नहीं।
उनके पोर्टफोलियो में लगभग 25 से 30 लिस्टेड कंपनियां और लगभग 25 स्टार्टअप शामिल हैं। वे 100 शेयरों वाला पोर्टफोलियो नहीं चाहते। उनकी आदत है कि जो शेयर महंगे लगते हैं उन्हें पहले वॉचलिस्ट में रखते हैं, फिर उनके कमजोर होने का इंतजार करते हैं और देखते हैं कि समस्या अस्थायी है या स्थायी। उनकी भाषा में वे किसी गिरती कंपनी को इस नजर से आंकते हैं कि वह बस बीमार है या मर चुकी है।
अगर बैलेंस शीट मजबूत है और रिकवरी की गुंजाइश है, तो वही कमजोरी एंट्री का मौका बन सकती है।
न्यूलैंड के अलावा टीजेएएस नेटवर्क्स ने उन्हें लगभग 4 साल में 20 से 25 गुना रिटर्न दिया। वे सेरा सैनिटरीवेयर को अपने जीवन के सबसे मजबूत निवेशों में से एक मानते हैं।
केडिया से मिला सबसे अहम सबक यह है कि मल्टीबैगर को सिर्फ शेयर की कीमत देखकर नहीं, बल्कि उसकी कहानी देखकर पहचाना जाता है। उनके मुताबिक पैसा आपको अमीर बना सकता है, लेकिन मजबूत बिजनेस की कहानी आपको समृद्ध बना सकती है।
तो यह थी विजय केडिया की पूरी कहानी कि वे भविष्य में मल्टीबैगर बनने की क्षमता वाले अच्छे स्ट्रोक वाले शेयर कैसे पहचानते हैं। लेकिन एक बार फिर, जैसा हमने शुरू में कहा, मनी नाइन का मकसद सिर्फ आपको जानकारी देना है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले उसकी अच्छी तरह रिसर्च करें और देखें कि वह आपके लक्ष्यों के अनुसार सही है या नहीं। इसके लिए आप किसी एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकते हैं। उम्मीद है आपको हमारी दी गई जानकारी पसंद आई होगी। ऐसे और वीडियो के लिए मनी नाइन देखते रहें और हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें।







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