저자: 미상 · 외국인
요약 보기
결론: 라케시 준준왈라의 투자 이력과 성공·손실 사례를 소개하는 전기형 영상으로, 향후 주가 전망 발언은 없음. [생애·투자 시작] 1960년 뭄바이 마와리 가문에서 태어났고, 부친은 소득세 공무원이었음. 14세 무렵 부친에게 주식시장에 대해 묻기 시작했고, 부친의 조언으로 신문을 읽기 시작함. 1985년 트레이더로 활동을 시작했으며, 당시 자본은 저축한 5,000루피였음. 당시 BSE 센섹스는 약 150포인트였다고 소개됨. [초기 투자 사례] 18% 이자로 2.5 lakh 루피를 빌려 투자했다고 소개됨. 타타 티(Tata Tea) 주식 5,000주를 43루피에 매수해 3개월 만에 143루피가 되어 약 3배 수익을 냈다고 함. 1986년 이후 3년 만에 약 25 lakh 루피를 벌었다고 소개됨. [베당타 관련 사례] 당시 28루피에 거래되던 철강 관련 기업 주식을 매수해 큰 수익을 냈다고 하며, 이 회사를 현재의 베당타(Vedanta)로 소개함. [정책 베팅 사례] 1999년 BP 싱 정부 출범 당시 재무장관 체제에서 예산이 기업 친화적일 것이라 보고 크게 투자해, 예산 발표 당일 3 crore가 20 crore가 되었다고 소개됨. [보유·장기 투자 사례] 타이탄(Titan)을 3루피에 매수했고 현재 약 24루피 수준이며, 여전히 4.4 crore 규모를 보유한다고 언급됨. 타타모터스, 아우로빈도 파마, 루핀 등 여러 종목 보유 이력이 소개됨. [투자 원칙] 수출이 없다면 뮤추얼펀드를 통해 주식에 투자할 것, 자본의 5%만 투기적으로 쓰고 나머지는 펀드에 넣을 것, 팁을 가장 큰 위험으로 볼 것, 6개월 내 원금 두 배를 기대하지 말 것 등을 강조함. [손실·말년] 한 기업에서 150 crore 손실을 본 사례와 2011년 순자산 약 30% 감소 사례가 소개됨. 2022년 8월 7일 항공사 사업을 시작했고, 2022년 8월 14일 심장마비로 사망했으며 오랜 기간 신장 질환을 앓았다고 소개됨.
다듬은 글
제목: Rakesh Jhunjhunwala | Stock market | पांच हजार से पैंतालीस हजार करोड़ का सफर | share market | stock 채널: Black & White
소개
दोस्तों, आज मैं शेयर बाज़ार की उस कहानी के बारे में बात करने जा रहा हूँ, जिसने ₹5000 से शुरुआत की और 45 हज़ार करोड़ तक का सफ़र तय किया। इन्हें भारत का Warren Buffett भी कहा जाता है, और ये कोई और नहीं, हमारे झुनझुनवाला जी हैं। चलिए दोस्तों, आज जानते हैं कि राकेश झुनझुनवाला का यह सफ़र कैसा रहा।
बचपन और परिवार
राकेश झुनझुनवाला का जन्म 5 जुलाई 1960 को मुंबई के एक मारवाड़ी परिवार में हुआ था। उनके पिता इनकम टैक्स ऑफिसर थे और माँ गृहिणी थीं। उनके घर पर अफ़सर पार्टियाँ किया करते थे। पिता अपने दोस्तों के साथ शेयर बाज़ार पर चर्चा किया करते थे। जब राकेश 14 साल के थे, तब वे पिता से शेयर बाज़ार के बारे में पूछने लगे। पिता ने उन्हें अख़बार पढ़ने की सलाह दी।
ट्रेडिंग की शुरुआत
यहीं से शुरुआत हुई। 1985 में वे ट्रेडर बन गए। वे शेयर बाज़ार में निवेशक बनना चाहते थे, लेकिन उस समय उनके पास निवेश के लिए पैसे नहीं थे। पिता ने साफ़ कह दिया कि अगर शेयर बाज़ार में पैसा लगाना है, तो मेरा पैसा इस्तेमाल मत करना। राकेश ने यह बात मान ली। उन्होंने बचाए हुए ₹5000 से निवेश शुरू किया। उस समय BSE सेंसेक्स लगभग ₹150 था, जो आज करीब ₹50,000 के आसपास है। अपना कारोबार बढ़ाने के लिए राकेश ने अपने भाई के एक दोस्त से 18% ब्याज पर ₹2.5 लाख का कर्ज़ लिया, इस भरोसे के साथ कि उन्हें अच्छा रिटर्न मिलेगा।
पहला बड़ा मुनाफ़ा
उस समय जब ट्रेंड चल रहा था, राकेश ने ₹43 पर टाटा टी के 5000 शेयर खरीदे। तीन महीने के अंदर टाटा टी का शेयर ₹143 तक पहुँच गया और उन्हें तीन गुना रिटर्न मिला। यह राकेश का पहला बड़ा मुनाफ़ा था। इसके बाद 1986 से तीन साल में राकेश ने ₹25 लाख कमा लिए। यह सिलसिला चलता रहा और कुछ ही सालों में वे एक बड़े कारोबारी बन गए।
वेदांता का दांव
फिर उनकी नज़र गोवा की एक स्टॉक पर पड़ी। यह लोहे की रॉड बनाने वाली कंपनी थी, जिसका शेयर ₹28 पर ट्रेड हो रहा था। राकेश ने अध्ययन किया और पाया कि इस शेयर से काफी मुनाफ़ा हो सकता है। उन्होंने 4 लाख शेयर खरीदे और देखते ही देखते शेयर की कीमत आसमान छूने लगी। यही गोवा की कंपनी आज हम वेदांता के नाम से जानते हैं।
पत्नी रेखा और एसी की शर्त
दोस्तों, राकेश झुनझुनवाला की पत्नी का नाम रेखा झुनझुनवाला है। वे भी शेयर बाज़ार में रुचि रखती हैं। राकेश जी बताते हैं कि शादी के बाद रेखा जी की बस एक ही माँग थी: घर में एसी लगवाना, क्योंकि उन्हें गर्मी बर्दाश्त नहीं होती थी।
1999 का बजट
साल 1999 में जब BP सिंह की सरकार बनी और वे वित्त मंत्री थे, तब सभी निवेशकों को लगा कि इस बार का बजट बिज़नेस-फ्रेंडली नहीं होगा। लेकिन राकेश जी की सोच अलग थी। उनका मानना था कि BP सिंह को बिज़नेस की अच्छी समझ है, इसलिए बजट बिज़नेस-फ्रेंडली होगा। उन्होंने आगे बढ़कर भारी निवेश कर दिया। उनके करीबी दोस्त बार-बार उन्हें ऐसा करने से रोक रहे थे।
आख़िरकार बजट के दिन वही हुआ जैसा राकेश जी सोच रहे थे। एक ही दिन में उन्होंने ₹3 करोड़ से ₹20 करोड़ कमा लिए। उस दिन वे रात 2 बजे घर पहुँचे और पत्नी रेखा जी से कहा कि इस बार गर्मी से पहले एसी ज़रूर लगवा लेना। हमारा प्यार ऐसा ही था।
निवेश का तरीका
राकेश झुनझुनवाला खरीदने से पहले स्टॉक को अच्छी तरह समझते थे। ऐसा ही एक स्टॉक था टाइटन, जिसे राकेश जी ने ₹3 में खरीदा था। आज उसकी कीमत लगभग ₹24 है। आज भी उनके पास टाइटन के ₹4.4 करोड़ के शेयर हैं। आज राकेश झुनझुनवाला कई कंपनियों के शेयरहोल्डर हैं, जिनमें Aurobindo Pharmaceuticals और Lupin जैसी कंपनियाँ शामिल हैं।
राकेश जी हमेशा कहते थे कि अगर आपके पास ज्ञान नहीं है, तो म्यूचुअल फंड के ज़रिए शेयर बाज़ार में निवेश करें। हाँ, अगर आप जोखिम लेना चाहते हैं, तो अपनी पूँजी के सिर्फ़ 5% से खेलें और बाकी म्यूचुअल फंड में लगाएँ। वे कहते थे कि टिप्स निवेश का सबसे बड़ा जोखिम हैं, और खाली हाथ निवेश मत कीजिए। अपने निवेश पर लगातार नज़र रखें और छह महीने में पैसा दोगुना होने की उम्मीद मत कीजिए। ऐसे आशावादियों के झाँसे में मत आइए। अगर आपकी ऐसी उम्मीदें हैं, तो पैसा शेयर बाज़ार में नहीं, घुड़दौड़ में लगाइए।
आख़िरी दौर का पोर्टफोलियो
राकेश झुनझुनवाला के पास अपने आख़िरी समय में 44 स्टॉक थे। इनमें टाइटन के अलावा टाटा मोटर्स में निवेश था, CRISIL में ₹1700 करोड़, फेडरल बैंक में ₹1300 करोड़, दो भारतीय हॉस्टल कंपनियों में ₹850 करोड़, NCC Limited में ₹550 करोड़, India Limited में ₹400 करोड़ और Nazara में ₹400 करोड़। इसके अलावा भी उनकी कई कंपनियों में हिस्सेदारी थी।
नुकसान और सपना
दोस्तों, राकेश झुनझुनवाला को सिर्फ़ सफलता ही नहीं मिली। उन्होंने कई बार बताया है कि नुकसान की भरपाई के लिए उन्हें शेयर बेचने पड़े। उनका कहना है कि एक बार एक कंपनी में उन्हें ₹150 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। साल 2011 में उनकी नेटवर्थ 30% तक घट गई थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में उन्होंने उसकी भरपाई भी कर ली।
7 अगस्त 2022 को उन्होंने अपना सपना प्रोजेक्ट शुरू किया, यानी एयरलाइन। जब उनसे पूछा गया कि इस समय एविएशन इंडस्ट्री इतनी मुश्किल में है, फिर आप एयरलाइन क्यों शुरू कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि मैं असफल होने के लिए तैयार हूँ। यही एयरलाइन शुरू करने का मंत्र था।
14 अगस्त 2022 को राकेश झुनझुनवाला का हार्ट अटैक से निधन हो गया। वे लंबे समय से किडनी की बीमारी से भी जूझ रहे थे।
यह थी राकेश झुनझुनवाला की कहानी। अगर आपको मेरी यह कहानी पसंद आई, तो लाइक कीजिए और मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए।

Comments 0