저자: MarcFaber · 외국인
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Marc Faber가 세계적 경기침체와 장기 약세장을 경고하며 리테일 투자자에게 반등 시 시장 이탈을 권고. 미국 증시는 무지한 개인투자자 유입으로 만들어진 대형 버블이며 트럼프의 관세 정책도 부정적이라고 주장. 엔비디아·테슬라·비트코인이 최근 고점 대비 큰 폭 하락한 사례를 근거로 제시. 과거 1987년 폭락을 예측했다는 이력을 내세움.
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सभी को होली दहन की शुभकामनाएँ। कहते हैं होली में सारी परेशानियाँ और चिंताएँ जल जाती हैं, लेकिन आज "डॉक्टर डूम" के नाम से मशहूर मार्क फेबर ने एक बार फिर खतरे की घंटी बजा दी है। मंदी की भविष्यवाणी करने के लिए वे दुनिया भर में जाने जाते हैं।
1987 में उन्होंने बार-बार शेयर बाज़ार के क्रैश की चेतावनी दी थी। उससे पहले, 1970 से ही वे लगातार मंदी का अनुमान लगाते आ रहे हैं। तो यह पहली बार नहीं है। इस बार खास बात यह है कि जब लोग विदेशी मुद्रा जैसी चीज़ों पर ध्यान नहीं दे रहे थे, तब भी वे डॉलर और दूसरी मुद्राओं के लिए मंदी के अनुमान दे रहे थे।
अब उनकी जो चिंताजनक बात सामने आई है, वह भारत के रिटेल और छोटे निवेशकों के लिए है। वे कह रहे हैं कि बाज़ार में जैसे ही उछाल या रिबाउंड का कोई संकेत दिखे, पहले ही संकेत पर बाज़ार से बाहर निकल जाओ। NDTV Profit को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि दुनिया भर में एक बहुत लंबी मंदी आने वाली है, और अगर बाज़ार में रिबाउंड आए तो भी सावधान रहें।
उनके अनुसार वैश्विक बाज़ारों पर आने वाली यह मंदी कई साल तक चल सकती है और बहुत दर्द दे सकती है। ऐसी स्थिति में महंगाई आपको यह भ्रम दे सकती है कि आपको रिटर्न मिल रहा है, जबकि असल में आपकी वास्तविक कीमत घट रही होती है। अगर महंगाई 6% हो और आपका रिटर्न 5% है, तो आपको लगेगा कि 5% कमाए, पर असल में आप महंगाई से 1% पीछे हैं।
पिछले साल उन्होंने कहा था कि अमेरिका और भारत में शेयर बाज़ार की तेज़ी अनजान रिटेल निवेशकों की वजह से है। बाज़ार का ज्ञान न रखने वाले नए छोटे निवेशक बाज़ार में आ गए और उन्हीं की वजह से बाज़ार उछल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इनमें से कई निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने NVIDIA, Tesla और Bitcoin के उदाहरण दिए। पिछली तेज़ी में इन पर जबरदस्त होड़ मची थी, सब लोग इन्हें खरीदने दौड़ पड़े थे, और उसी से कीमतें बढ़ीं। लेकिन हाल में देखें तो तीनों में भारी गिरावट आई है। ऊँचे भाव पर खरीदने वाले लोग अब फँस गए हैं। पिछले एक महीने में Tesla करीब 30%, NVIDIA करीब 17% और Bitcoin करीब 13% गिरा है। उनका कहना है कि पिछले दो महीनों में रिटेल निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है।
अब उनकी चेतावनी है कि अगर भारतीय निवेशक सावधान नहीं रहे, तो उन्हें भी ऐसा ही नुकसान हो सकता है या उनके साथ भी वैसी ही स्थिति बन सकती है।
लंबी अवधि के नज़रिए से भी वे बहुत संशयवादी हैं। खासकर अमेरिका में लंबे समय के निवेश में उन्हें कोई उम्मीद नहीं दिखती। उनके मुताबिक अमेरिका इतिहास का सबसे बड़ा बबल है, ऐसा बबल जो किसी भी समय फट सकता है। बबल का मतलब है कि उसकी असली वैल्यू नहीं है, उसके पीछे ठोस आधार नहीं है, फिर भी बाज़ार दौड़ रहा है। इसलिए वे इस समय चिंता जता रहे हैं और कह रहे हैं कि बाज़ार की भावना के उलट पोज़िशन लें और सबसे बुरे के लिए तैयार रहें।
वैश्विक व्यापार को लेकर उन्होंने अमेरिका को आगाह किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आयात शुल्क (टैरिफ) से जुड़े फैसले बहुत बुरे फैसले हैं। आर्थिक हस्तक्षेप के नज़रिए से यह ऐसा कदम है जिसे सबसे बुरे सपने के रूप में देखा जा सकता है।
मार्क फेबर अपने बेहद तीखे विचारों के लिए जाने जाते हैं, फिर भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों, खासकर निवेश और वित्त के हलकों में उनकी बातों को गंभीरता से लिया जाता है। उनका इतिहास देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इस बार फेबर जो कह रहे हैं, वह सच न भी निकले, फिर भी सावधानी बरतना ज़रूरी है।
आज के लिए बस इतना ही, B Adda पर बने रहिए। आप सभी को नमस्कार, धन्यवाद।

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