저자: 미상 · 외국인
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故 라케시 준준왈라의 투자 철학 소개. 시장 흐름에 맞춰 적응하고 기회를 포착해야 한다고 강조. 가치투자로 저평가된 주식(타이탄 사례) 매수 권유, 장기 투자와 꾸준한 적립식 투자 강조. 사업(기업이 아닌 비즈니스)을 보고 투자하고 감정을 배제한 논리적 사고 필요. 워런 버핏의 연구 중심 투자 방식도 언급.
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Friends, अगर आप शेयर बाजार में निवेश करके अच्छा रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि हम शेयर बाजार के किंग राकेश झुनझुनवाला की ज़िंदगी से कुछ अहम सबक आपके सामने रखने वाले हैं। अगर आप इन बातों को ध्यान में रखकर निवेश करते हैं, तो कम जोखिम के साथ शेयर बाजार से अच्छा रिटर्न निकाल सकते हैं।
इसमें कोई शक नहीं कि राकेश झुनझुनवाला शेयर बाजार के किंग थे। उनके निवेश और निवेश की रणनीतियाँ कहीं न कहीं हर किसी को उनके रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। शायद इसी वजह से उन्हें भारत का वॉरेन बफेट कहा जाता था, क्योंकि उनकी निवेश की फिलॉसफी भी वॉरेन बफेट से काफी मिलती-जुलती है।
तो चलिए जानते हैं कि इन्वेस्टमेंट गुरु और दलाल स्ट्रीट के बेताज बादशाह राकेश झुनझुनवाला की ज़िंदगी से हम क्या सीख सकते हैं। राकेश झुनझुनवाला कहा करते थे कि शेयर बाजार में निवेशकों को हमेशा बाजार के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है। उनका मानना था कि बाजार में आपको ग्रिड की तरह हमेशा रंग बदलने चाहिए, और अगर आप उसके खिलाफ गए तो नुकसान उठाना पड़ेगा।
राकेश झुनझुनवाला कहते थे कि अगर आप शेयर बाजार में अच्छा निवेशक बनना चाहते हैं, तो आपको हमेशा सतर्क रहना होगा। आपको पता होना चाहिए कि मौका किस दिशा से आ रहा है, लेकिन यह आपको तभी पता चलेगा जब आप बैठकर मौके की तलाश करेंगे। दोस्तो, राकेश झुनझुनवाला वैल्यू इन्वेस्टिंग करते थे।
वैल्यू इन्वेस्टिंग ऐसा निवेश है जिसकी वैल्यू समय के साथ बहुत बढ़ती है, लेकिन जिस समय वह व्यक्ति उस चीज़ को खरीदता है, उस समय उसे कोई खरीदने को तैयार नहीं होता। जैसे उन्होंने टाइटन कंपनी के शेयर सिर्फ़ कुछ रुपये प्रति शेयर की कीमत पर खरीदे थे, जिसकी आज की वैल्यू लगभग 500 रुपये है। इससे पता चलता है कि शेयर खरीदने का उनका मुख्य फंडा यह था कि जब किसी कंपनी के शेयर उनकी वैल्यू से कम कीमत पर मिल रहे हों, तो उस समय उन्हें ज़रूर खरीद लेना चाहिए।
यानी सीधे शब्दों में कहें तो जब कोई उस शेयर को खरीदने को तैयार न हो और उसकी कीमत सच में गिर चुकी हो, तब आपको वह शेयर खरीद लेना चाहिए, और मेरी बात मानिए, आने वाले समय में इन शेयरों की कीमत कई गुना बढ़ेगी। राकेश झुनझुनवाला से हम जो एक और बात सीख सकते हैं, वह है हमेशा आशावादी (ऑप्टिमिस्टिक) बने रहना।
राकेश झुनझुनवाला का उम्मीद की दुनिया से गहरा रिश्ता था। जब हम उनके शेयरों को देखते हैं, तो पाते हैं कि उन्होंने कई ऐसे स्टॉक्स में निवेश किया जिन्हें आप, मैं और ज़्यादातर लोग कभी नहीं खरीदते, क्योंकि हमें साफ़ लगता है कि इनसे भविष्य में ज़्यादा मुनाफा नहीं होगा। लेकिन राकेश झुनझुनवाला उन शेयरों को लेकर आशावादी बने रहे।
उन्हें भरोसा था कि ये शेयर भविष्य में मुनाफा देंगे, और वैसा ही हुआ। जब उन्होंने सेसा गोआ के शेयर खरीदे, तब उनकी वैल्यू ज़्यादा नहीं थी। फिर भी उन्होंने उन्हें खरीदा। राकेश झुनझुनवाला कहते हैं कि अगर हम सकारात्मक सोचते हैं, तो बाजार बदलने पर भी चिढ़चिढ़ेपन या निराशा के आगे नहीं झुकते, और हमारी उम्मीद ज़िंदा रहती है।
वे कहते हैं कि हमें अपने देश की ग्रोथ स्टोरी कभी नहीं भूलनी चाहिए कि देश ने आज जहाँ तक पहुँचने के लिए कितना संघर्ष किया है। बाजार भी देश की ग्रोथ के साथ-साथ बढ़ता है। राकेश झुनझुनवाला से मिली अगली सीख यह है कि हमें अपने शेयर लंबे निवेश के उद्देश्य से खरीदने चाहिए, क्योंकि शेयर बाजार बहुत अस्थिर (वोलेटाइल) होता है।
इतने उतार-चढ़ाव आते हैं कि शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट से मुनाफा कमाना निवेशक के लिए बहुत मुश्किल होता है। वे सही रणनीति भी नहीं बना पाते। इसीलिए राकेश झुनझुनवाला हमेशा सलाह देते थे कि आपका निवेश हमेशा लंबे समय के लिए होना चाहिए। वे कहते हैं कि आपको किसी कंपनी में नहीं, बल्कि बिज़नेस में निवेश करना चाहिए।
अगर हम किसी कंपनी में सिर्फ़ उसका नाम देखकर निवेश करते हैं, तो पैसे गँवा सकते हैं। लेकिन अगर हम अच्छे मैनेजमेंट और कल्चर वाले बिज़नेस में निवेश करते हैं, जिसके प्रोडक्ट्स की भविष्य में मांग बढ़ने की उम्मीद हो, और कंपनी का विज़न अच्छा हो, तो ऐसे प्रोडक्ट में निवेश आपके निवेश को कई गुना बढ़ाता है और पैसे गँवाने का जोखिम भी काफी कम हो जाता है।
राकेश झुनझुनवाला निवेश में निरंतरता (कंसिस्टेंसी) को भी बहुत अहमियत देते थे, और यह हमारी अगली सीख है। असल में हम सोचते हैं कि शेयर बाजार एक जोखिम भरा बाजार है। अगर हम यहाँ लगातार निवेश करें, तो शायद हमें वैसा मुनाफा न मिले। लेकिन राकेश झुनझुनवाला की सोच हमसे काफी अलग है।
वे कहते हैं कि जैसे हम बैंकों और म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं, वैसे ही शेयर बाजार में भी हमें लगातार निवेश करना चाहिए। अगर आप एक-दो बार निवेश करते हैं, तो हो सकता है आपको रिटर्न न दिखे, या आप पैसे न कमा पाएँ, या फिर पैसे गँवा भी दें। लेकिन अगर आप लगातार एक तय रकम निवेश करते हैं, तो मुनाफा ज़रूर दिखेगा।
जब आप अपने निवेश को लंबे समय तक बनाए रखते हैं, तो आप बहुत कुछ सीखते हैं। शेयर बाजार में अनुभव बहुत मायने रखता है। आपका मुनाफा इस पर निर्भर करता है कि आप किसी स्टॉक को कितनी अच्छी तरह समझते हैं। इसलिए जो निवेशक लंबे समय से निवेश कर रहे हैं, उनके मुनाफा कमाने और पैसे न डूबने की संभावना ज़्यादा होती है। राकेश झुनझुनवाला से हम जो अगली सीख लेते हैं, वह है अपनी भावनाओं (इमोशंस) पर काबू रखना, क्योंकि शेयर बाजार ऐसी जगह है जहाँ भावनाओं के आधार पर निवेश करने से भारी नुकसान हो सकता है।
जिस स्टॉक में आप निवेश कर रहे हैं, उसके बारे में हमें तार्किक सोच (लॉजिकल थिंकिंग) के साथ आगे बढ़ना चाहिए। आपको स्टॉक की हर छोटी से छोटी जानकारी इकट्ठा करनी चाहिए, तभी निवेश का फैसला लेना चाहिए। यह सिर्फ़ राकेश झुनझुनवाला की शिक्षा नहीं है, दुनिया के सबसे बड़े निवेशक वरुण बफेट भी यही सलाह देते हैं। वे साल में बहुत कम स्टॉक्स में निवेश करते हैं और पूरा साल रिसर्च में बिताते हैं।
उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर वे साल में दो-तीन ऐसे स्टॉक्स ढूंढ लेते हैं जिनमें उन्हें निवेश करना चाहिए, तो यह उनके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। बड़े निवेशक भी स्टॉक्स पर रिसर्च में काफी समय लगाते हैं। हालांकि यह एक बहुत बुनियादी काम है जो हर निवेशक को करना चाहिए, फिर भी कई नए निवेशक जल्दी मुनाफा कमाने के जाल में फँस जाते हैं।
उन्हें लगता है कि अगर वे शेयर बाजार में निवेश करेंगे तो दो-तीन महीनों में उनका पैसा दो-तीन गुना हो जाएगा। इस प्रक्रिया में वे अक्सर अपना पैसा गँवा देते हैं। इसलिए अगर आप भावनाओं को किनारे रखकर तार्किक सोच पर टिके रहते हैं, तो शेयर बाजार से बहुत अच्छे नतीजे पा सकते हैं। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया, तो इसे लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें। सब्सक्राइब करने के लिए धन्यवाद।


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